भक्ति: प्रेम का मार्ग

भक्ति, वास्तव में, प्रेम का सबसे सीधा मार्ग है। यह click here , स्वयं से परे जाकर, {ईश्वर|आत्मा|दिव्य शक्ति| के साथ|के साथ|से| मिलन की{ इच्छा|कामना|

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भक्ति: प्रेम और समर्पणभक्ति: प्रेम एवं समर्पणभक्ति: भक्ति: प्रेम और समर्पण

अनुराग का अर्थ है असीम स्नेह और समर्पित समर्पणबलिदान. यह एक गहरी भावना है, जो मन को ईश्वर की ओर आकर्षित है। वास्तविक आस्था में, स्वार्थ

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भक्ति: प्रेम और समर्पणभक्ति: प्रेम एवं समर्पणभक्ति: भक्ति: प्रेम और समर्पण

भक्ति का अर्थ है अखंडित प्यार और समर्पित समर्पणत्याग. यह एक गहरी भावना है, जो आत्मा को ईश्वर की ओर खींचती है। गहरी अनुराग में, अहंकार का

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भक्ति: प्रेम और समर्पणभक्ति: प्रेम एवं समर्पणभक्ति: भक्ति: प्रेम और समर्पण

अनुराग का अर्थ है असीम प्रेम और अखंड समर्पणसमर्पण. यह एक अतिशय अनुभूति है, जो मन को परमेश्वर की ओर आकर्षित है। वास्तविक आस्था में, स्वा�

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भक्ति: प्रेम और समर्पणभक्ति: प्रेम एवं समर्पणभक्ति: भक्ति: प्रेम और समर्पण

आस्था का अर्थ है गहन प्यार और समर्पित समर्पणसमर्पण. यह एक अतिशय भावना है, जो मन को ईश्वर की ओर खींचती है। सच्ची भक्ति में, ego का स्थान त्य�

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